
कोई खुशबू है उसमें जो अपनी तरफ खींचता है मुझे…
उससे बात ही नहीं होती मेरी पर लगता है उसके बारे में सारी बातों को जानती हूं मैं…
क्यों लगता है कि मेरी तरह ही वह मेरी ख्वाब बुनता होगा…
काफी कुछ हो गया है हम दोनों के बीच फिर भी उसे छोड़ने का मन नहीं करता है और चुप्पी तोड़ने का भी…
पूरे साल बीत गए 6 महीने से देखा नहीं है उसे फिर भी लगता है कल की ही तो बात है…
यह शायद इसलिए है क्योंकि कोई ऐसा दिन नहीं जिसमें मैं उसे याद ना करती हूं…
पर उसे याद करना और मुस्कुराना मन को बहुत भाता है…
एक आस है जो मेरे इन हाथों को छोड़ती ही नहीं…
बोलती है वह आ जाएगा तुम चलती रहो…
उसके प्यार में तुम बहती रहो…

